अमानक फिटकरी से हो रहा जलशोधन!

 

गंदा पानी पीकर लोग पड़ रहे बीमार, भाजपा शासित पालिका मौन

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। बारिश के आगमन के साथ ही लोगों के घरों से दूषित, मटमैला पानी आना आरंभ हो गया है। कीचड़ और दुर्गंध युक्त पानी को देखकर यही प्रतीत हो रहा है कि या तो जल शोधन में अमानक फिटकरी का उपयोग किया जा रहा है अथवा जल शोधन किये बिना, सीधे-सीधे रॉ वाटर ही लोगों को प्रदाय किया जा रहा है।

नगर पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि श्रीवनी स्थित जल शोधन संयंत्र (फिल्टर प्लांट) को, उपयोग में आने वाली फिटकरी और ब्लीचिंग पाउडर को प्रयोगशाला में परीक्षण कराये बिना ही चलाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आलम यह है कि अनेक बार तो ब्लीचिंग पाऊडर और फिटकरी का उपयोग किये बिना सीधे-सीधे ही रॉ वाटर को प्रदाय कर दिया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गंदा और मटमैला पानी आने की शिकायत अनेक वार्ड के पार्षदों के द्वारा सतत रूप से पालिका प्रशासन को की जा रही है। सूत्रों ने कहा कि पालिका के अनेक पार्षद चूंकि अपने – अपने वार्ड में ही पले बढ़े हैं अतः उनके वार्ड के बड़े बूढ़े उन्हें यह ताना दे रहे हैं कि वार्ड के निवासियों के द्वारा उन्हें इसलिये नहीं चुना गया है कि वे गंदा पानी पीयें। वार्डों के पार्षदों की स्थिति अपने ही वार्ड के बड़े बूढ़ों के सामने बेहद असहज होती दिख रही है।

पालिका के भाजपा के एक पार्षद ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उनके द्वारा जब पानी की टंकियों से लेकर श्रीवनी होते हुए भीमगढ़ के सूआखेड़ा तक दौरा कर पतासाजी की गयी तब उन्हें कर्मचारियों ने जो बातें बतायीं वे हैरत अंगेज ही हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीवनी फिल्टर प्लांट के कर्मचारियों के द्वारा उन्हें ऑफ द रिकॉर्ड यह बताया गया है कि जितना पानी सिवनी की पानी की टंकियों को भरने के लिये (वर्तमान स्थिति में) लगता है, उसके शोधन में ही घण्टों लग जाते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बारिश का पानी भीमगढ़ बाँध में जाने से पानी मटमैला हो गया है, जिसके शोधन में समय ज्यादा लग रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जल शोधन के लिये ब्लीचिंग पाऊडर और फिटकरी का उपयोग अगर किया जा रहा है तो इसका परीक्षण पालिका के द्वारा कब कराया गया और इन लॉट्स का उपयोग कब आरंभ किया गया, इसका अगर मिलान कर लिया जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।

उक्त पार्षद का कहना था कि यह कंज्यूमेवल आईटम है अर्थात आज अगर बिना रसायनों के सीधे-सीधे रॉ वाटर प्रदाय कर दिया गया तो दूसरे दिन यह पता करना बहुत ही मुश्किल है कि उसके पहले वाले दिन जो पानी प्रदाय किया गया था, उसे रसायनों के जरिये साफ किया भी गया था अथवा नहीं! इसका कारण यह है कि रोज-रोज प्रदाय होने वाले पानी की सैंपलिंग का कोई प्रावधान ही नहीं है।

उन्होंने बताया कि लगभग आठ-नौ महीनों से बीच-बीच में श्रीवनी फिल्टर प्लांट से बिना जल शोधन के ही सीधे पानी को फीडर लाईनों के माध्यम से पानी की टंकियों में भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि बारिश के अलावा अन्य महीनों में भीमगढ़ बाँध का पानी अपेक्षाकृत साफ होता है अतः यह फर्क महसूस नहीं किया जा सका है कि पानी फिल्टर्ड था या रॉ वाटर।

इसके साथ ही उन्होंने आगे बताया कि कर्मचारियों का कहना है कि अगर पानी को श्रीवनी में फिल्टर किया जाकर टंकियों को भरा जाये तो आधी टंकियां ही बमुश्किल भर पायेंगी। पानी की बढ़ी माँग को देखकर पालिका प्रशासन के द्वारा भी बिना फिल्टर के ही रॉ वाटर लंबे समय से शहर को प्रदाय किया जा रहा है।

उधर, पालिका के भरोसेमंद सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि बारिश में लोगों के घरों से आने वाले पानी में केंचुए एवं अन्य जीव जंतु अगर निकल रहे हैं तो इसका कारण शोधित जल की बजाय रॉ वाटर की सप्लाई ही प्रमुख है।

 

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