सरकारी रूक्कों का क्या मतलब!

(शरद खरे)
देश-प्रदेश में अराजकता न फैले इसके लिये सरकारों के द्वारा नियम कायदे बनाये गये हैं। इन नियम कायदों के पालन के लिये अधिकारियों को ताकीद भी किया गया है। सरकारी स्तर पर जारी होने वाले आदेशों का पालन समय सीमा में सुनिश्चित हो इसकी जवाबदेही विभाग के अधिकारियों पर आहूत होती है।
सिवनी जिले में पिछले एक डेढ़ दशक में जिस तरह से सरकारी फरमानों को बलाए ताक पर रखा जा रहा है वह वाकई चिंता का विषय माना जा सकता है। आदेश चाहे केंद्र सरकार के हों, राज्य के या जिला प्रशासन के, इन आदेशों की तामीली हो रही है अथवा नहीं इस बारे में कोई संजीदा नहीं दिखता है।
केंद्र सरकार के द्वारा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तहत सिवनी में फोरलेन का निर्माण कराया गया है। नियमों के हिसाब से निर्धारित दूरियों पर दुर्घटना में घायलों के बचाव के लिये सुविधाएं बनायी गयीं हैं। इन सुविधाओं को किसी भी हालत में कम नहीं किया जा सकता है, बल्कि समय-समय पर इन्हें अपग्रेड अवश्य किया जा सकता है।
विडम्बना ही कही जायेगी कि वर्ष 2010 में सिवनी में बनी फोरलेन तो एनएचएआई के द्वारा अपने प्रभार में ले ली गयी पर सिवनी शहर के बायपास पर बनने वाले ट्रामा केयर यूनिट की संस्थापना की पहल किसी के द्वारा भी नहीं की गयी। देखा जाये तो इसके निर्माण के लिये जिले के दोनों सांसद बोध सिंह भगत और फग्गन सिंह कुलस्ते सहित जिला कलेक्टर के द्वारा कार्यवाही की जाना चाहिये थी।
इसी तरह राज्य सरकार के द्वारा जिला चिकित्सालय में बनाये गये ट्रामा केयर यूनिट को दो सालों में भी आरंभ नहीं करवाया जा सका है। इतना ही नहीं मॉडल रोड और नवीन जलावर्धन योजना भी अपनी तय समय सीमा को सालों पहले पार कर चुकी है, पर किसी ने भी इस दिशा में ध्यान देकर ठेकेदार के खिलाफ किसी तरह की दण्डात्मक कार्यवाही की सिफारिश नहीं की है।
और तो और पिछले साल नवंबर में प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आर.के.श्रीवास्तव के द्वारा रेडियोग्राफर टीकाराम बघेल को सिवनी से घंसौर स्थानांतरित किया गया था। छः माह बाद उनकी तैनाती वहाँ से गोपालगंज कर दी गयी। सीएमएचओ के द्वारा छः महीने में, टीकाराम बघेल के द्वारा घंसौर में कार्यभार ग्रहण क्यों नहीं किया गया, इस बारे में पतासाजी नहीं की गयी और न ही उन्हें कारण बताओ नोटिस ही जारी किया गया।
इतना ही नहीं प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रहे डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव जो अब प्रभारी सिविल सर्जन हैं को पद से हटाने के लिये राज्य शासन के द्वारा दिसंबर 2017 में आदेश जारी किया गया था। इसके बाद भी अधिकारी का इतना साहस नहीं है कि वे प्रभारी सीएस को जिला चिकित्सालय में पदस्थ (जैसा कि आदेश हुआ था) कराते हुए उन्हें मरीजों को देखने के लिये बाध्य कर सके।
कुल मिलाकर सरकारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करवाने के लिये तैनात मैदानी अमला ही इस पूरे मामले में कटघरे में खड़ा दिख रहा है। लोगों का कहना है कि इससे बेहतर तो काँग्रेस का शासन काल था, कम से कम उस दौर में सरकारी रूक्कों की नाफरमानी के मामले तो सामने नहीं आया करते थे और शासन-प्रशासन की छवि जिम्मेदारी की बनी दिखती थी . . .

अब पाईए अपने शहर की सभी हिन्दी न्यूज (Click Here to Download) अपने मोबाईल पर, पढ़ने के लिए अपने एंड्रयड मोबाईल के प्ले स्टोर्स पर (SAI NEWS ) टाईप कर इसके एप को डाऊन लोड करें . . .

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

समाचार एजेंसी डॉट कॉम में आपका स्वागत है 

App Downlod Link: Click Here 
App Downlod Link: Click Here 

%d bloggers like this: