सीएस को पद से हटाने आ रहा प्रशासन को पसीना!

0 क्या सीएस की वेतनवृद्धि . . . 03
मनमानी पर उतारू सिविल सर्जन को हटाने से कतरा रहा प्रशासन
(अय्यूब कुरैशी)
सिवनी (साई)। जिला चिकित्सालय के प्रभारी सिविल सर्जन को राज्य शासन के द्वारा लगातार कथित तौर पर पदावनत किया गया है पर अधिकारियों को साधने में बाजीगर माने जाने वाले प्रभारी सिविल सर्जन डॉ.आर.के. श्रीवास्तव को जिला चिकित्सालय में मरीज देखने के लिये बाध्य करने में जिला प्रशासन को भी पसीना आता दिख रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मूलतः अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के द्वारा अपने सेवाकाल में लगभग दो दशकों तक मरीज देखने के मूल काम को दरकिनार कर, प्रशासनिक कामों को अपने हाथ में लेकर रखा गया था।
उक्त संबंध में सूत्रों ने बताया कि लगभग दो दशकों से डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को साधा जाकर प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का मलाईदार पद अपने पास रखा गया है। सिवनी के अलावा भी वे अन्य जिलों में प्रभारी सीएमएचओ रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि सीएमएचओ के अधीन सिविल सर्जन काम करता है। राज्य शासन के द्वारा जब डॉ.के.सी. मेश्राम को प्रभारी सीएमएचओ बनाकर सिवनी भेजा गया था तब उस आदेश के जारी होने के लगभग छः माह बाद डॉ.श्रीवास्तव का प्रभार डॉ.के.सी. मेश्राम को देने के निर्देश दिये गये थे। इस बात को लेकर भी सियासी हल्कों में जमकर चर्चाएं चलती रहीं।
इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि डॉ.आर.के. श्रीवास्तव की एक खासियत है। उनकी पदस्थापना जहाँ भी होती है वे अपने साथ एक स्वजातीय लिपिक को भी लेकर जाते हैं। सूत्रों ने कहा कि उनके स्वजातीय लिपिक का तबादला भी उनके तबादले के बाद उनकी तैनाती वाले जिले में हो जाता है।
सूत्रों की मानें तो इसके बाद आरंभ होता है सारा खेल। सूत्रों ने इस बात के संकेत दिये कि प्रभारी सीएस डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा अपने स्वजातीय लिपिक को सीएमएचओ एवं सिविल सर्जन कार्यालय के भण्डार का घोषित और अघोषित प्रभारी बना दिया जाता है। सूत्रों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के भण्डार में हर साल करोड़ों की दवाओं के वारे न्यारे होते हैं।
यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि प्रभारी सिविल सर्जन डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव को सीएस पद से हटाया जाकर उनके स्थान पर डॉ.विनोद नावकर को प्रभारी सीएस का प्रभार देने के लिये राज्य शासन के द्वारा दिसंबर 2017 में आदेश जारी किये जा चुके हैं। इस आदेश में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख किया गया है कि डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा अस्पताल में मरीजों को देखने का कार्य किया जायेगा।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद भी अधिकारियों को साधने में माहिर डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड को भी शीशे में उतारा जाकर आधा साल बीतने के बाद भी सीएस का प्रभार डॉ.नावकर या किसी अन्य चिकित्सक को न दिया जाकर, मरीज देखना आरंभ नहीं किया है।
स्वास्थ्य विभाग में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार सेवानिवृत्ति की कगार पर खड़े डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा हाल ही में रोगी कल्याण समिति के जरिये सफाई कर्मियों की भर्त्ती की गयी है। यह मामला बहुत ही संगीन और वित्तीय अनियमितता वाला हो सकता है एवं यह मामला जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड (जो रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष हैं) के लिये परेशानी का सबब भी बन सकता है।
चर्चाओं के अनुसार कलेक्टर्स को कटघरे में खड़ा करना प्रभारी सिविल सर्जन डॉ.आर.के. श्रीवास्तव का प्रिय शगल रहा है। इसके पहले तत्कालीन जिला कलेक्टर धनराजू एस. की एक निजि पार्टी में शराब – कवाब के चित्र को सोशल मीडिया में वायरल कर डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा धनराजू एस. के लिये मुश्किलें पैदा की गयीं थीं।

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