नाले के ऊपर दुकान!

 

(शरद खरे)

सिवनी नगर पालिका परिषद की बेढंगी चाल सालों से बदस्तूर जारी है। पालिका को जब भी किसी बात की सप्रमाण शिकायत की जाती है तो उसके बाद नगर पालिका परिषद के अधिकारियों के द्वारा उसकी व्याख्या कुछ इस तरह से की जाती है कि मामला सुलझने की बजाय उलझता ज्यादा दिखता है।

शहर का मुख्य बाज़ार है बुधवारी। बुधवारी बाज़ार आज नहीं दशकों से व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ जरूरत की हर चीज मिल जाती है। शहर में आज बारापत्थर, भैरोगंज, छिंदवाड़ा चौराहा, मिशन स्कूल के आसपास भले ही बाजार स्थापित हो चुके हों पर बुधवारी बाजार का अपना अलग महत्व आज भी बरकरार ही है।

हर साल बारिश के महीनों में बुधवारी बाजार के व्यापारी यही मनाते होंगे कि बारिश तो हो पर वह शहर की बजाय ग्रामीण अंचलों में हो ताकि खेती को पर्याप्त पानी मिल सके। ऐसा इसलिये क्योंकि शहर में थोड़ा सा ज्यादा पानी गिरते ही बुधवारी बाजार जलमग्न हो जाता है। दुकानोें के अंदर पानी भर जाता है।

लगभग हर साल होने वाली बारिश के दौरान, पानी के द्वारा बुधवारी बाजार में इस कदर कहर बरपाया जाता है कि दुकानों का सामान ही सड़कों पर तैरता नजर आता है। नगर पालिका के द्वारा हर साल दुकानदारों से नालियों में कचरा न डालने की अपील की जाती है। यह अपील महज कागजों पर ही होती दिखती है, क्योंकि इस अपील के बाद भी बारिश में बुधवारी बाजार में पानी का भरना बंद नहीं होता है। इससे साफ जाहिर है कि सालों से पालिका के द्वारा बुधवारी बाजार में जल भराव न हो, इसके लिये किये गये उपाय नाकाफी ही हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया व्हाट्सएप्प और फेसबुक पर राज जनरल स्टोर वाली गली की एक दुकान का फोटो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें दुकान के बीचों बीच एक चैंबर दिखाया जा रहा है। इस चैंबर के पास पालिका के कुछ जिम्मेदार अफसरान भी खड़े दिख रहे हैं। अगर नालों पर इस तरह से अतिक्रमण कर उन्हें बंद कर दिया जायेगा तो निश्चित तौर पर बुधवारी बाजार को जलमग्न होने से शायद ही कोई रोक पाये। इस चित्र को सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र मंद्रेला के द्वारा डाला जाकर यह लिखा गया है कि इसका क्या हुआ अध्यक्षजी!

यक्ष प्रश्न यही है कि इस तरह के चित्र सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो क्या पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की नजरों से यह बचा रहा होगा, जाहिर है नहीं। इसका तात्पर्य यही है कि पालिका के अधिकारी जानबूझकर अपनी जवाबदेहियों का निर्वहन करने से कतरा रहे हैं।

इस मामले में सांसद बोध सिंह भगत, सिवनी विधायक दिनेश राय सहित विपक्ष में बैठी काँग्रेस ने इस मामले में मौन साधा हुआ है। इन परिस्थितियों में लोगों की निगाहें अब संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड की ओर लगी हुई हैं। उनसे जनापेक्षा है कि वे ही इस मामले में संज्ञान लेकर बुधवारी बाजार के इस तरह के अतिक्रमणों को हटवाने के मार्ग प्रशस्त करें ताकि बुधवारी बाजार में जलभराव को रोका जा सके।

 

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